राजीव रत्न पाराशर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
राजीव रत्न पाराशर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 5 अक्टूबर 2022

395-बोलो रावण किसने मारा?

 राजीव रत्न पाराशर, कैलिफोर्निया


 

इसने   मारा,   उसने   मारा

बोलो रावण किसने मारा?

 उसने जिसने घुटनों तक के

हाथ खींचकर तीर चलाया,

या वो भाई  जिसने  अमृत

नाभि  में  है  यह बतलाया॥

 

उन देवों ने जिन्हें हराकर

उनसे  पानी  भरवाया था.

या फिर उसकी नियति जिसने

उसको राक्षस बनवाया था॥

 

शाप लगा क्या उस कुबेर की

बेटी  का  जो  रोज़  तड़पती,

या फिर हाय लगी जनता की

हाय- हाय  जो रोज़  तरसती॥

 

सीता मैया  की पावनता

उसकी नैया ले कर डूबी,

शूर्पनखा –“ये मेरा बदला

ले लो भैया” कहकर डूबी॥

 

बन्दर  भालू  की  हुंकारों

के डर ने दहला कर मारा,

दस दिमाग़ ने दस सुझाव दे

संशय में ला लाकर मारा॥

 

किसने पकड़ा किसने छोड़ा

ये तो मुझको  पता नहीं है,

लेकिन सच्ची बात बताऊँ

रावण अब तक मरा नहीं है॥

 

दिखता गांधी टोपी में वो

कभी सूट और टाई में भी,

सास बहू में, दोस्त- दोस्त में

अक्सर  भाई  भाई  में भी॥

 

लोभ मोह हो,द्वेष द्रोह हो

रावण वहीं पसर जाता है,

जहां किया कुछ ग़ुस्सा समझो

रावण वहीं बिफर जाता है॥

 

हाँ फटे बम, हाँ घुटे दम

सदमे में हों  या हो  सहमे,

दो  रत्ती, दो  बित्ते  रावण

छुपा हुआ है तुझमें- मुझमें॥

 

हिम्मत कर, कुछ आगे बढ़ हम

मारें  अपना  अपना  रावण,

मन का वाल्मीकि लिख देगा

फिर से जीवन की रामायण॥

--0-–

सोमवार, 22 अगस्त 2022

383-खुद से मुलाक़ात हुई

 

राजीव रत्न पाराशर( कैलिफोर्निया )

 

उछला मन बल्लियों,


ऐसी कुछ बात हुई।

बहुत दिनों बाद आज

खुद से मुलाक़ात हुई।

 

मिलने के लिये मैंने

खुद ही को बुलाया।

हाल चाल पूछे ,

फिर हाथ भी मिलाया।

 

मिल बैठे दो जन,

मस्ती के आलम में।

एक तो मैं 

और दूसरा भी मैं।

 

गम्भीर से मुद्दों पर

विचार- विमर्श हुआ।

हम दोनो भिन्न नहीं

यही निष्कर्ष हुआ।

 

शिकवे भी साझा कि

कुछ ग़ुस्सा भी फूटा।

बहुरूपी से मन का

कोई पहलू ना छूटा।

 

जाना ये आज कि

इंसान मैं अच्छा हूँ।

ज़ुबान से शायर हूँ,

दिल का सच्चा हूँ।

 

मेरे बिन ये दुनिया

वाक़ई अधूरी है।

अपने आप से मिलना

इसीलि ज़रूरी है।

 

ज़रूरी इसलिए नहीं कि

मन में कुछ अहम् है।

बस इसलिए कि यहाँ

हम जैसे सिर्फ़ हम हैं।

 

यूँ तो हम दुनिया की

ख़ूब ख़ाक छानते हैं।

पर अपने बारे में हम

कितना कम जानते हैं।

 

खुद की अनदेखी की

कितना अजीब हूँ।

यह मैं ही हूँ जो मेरे

सबसे क़रीब हूँ।

 

मिलना सब लोगों से

मेरा भटकाव था।

मिलना ये खुद से ही

अंतिम पड़ाव था।

 

अब मिलने मिलाने का

और झमेला न रहा।

मैं खुद से मिला, फिर

कभी अकेला न रहा।

-0-

रविवार, 7 अगस्त 2022

380-प्रयत्न

 

राजीव रत्न पाराशर (केलीफोर्निया)

 

 सम्भावना हर स्वप्न को साकार कर देगी। 


प्रेरणा,कौतुक का,  आविष्कार कर देगी॥

 

हर मर्म का संकोच, मीमांसा रही होगी

समाधान का स्रोत जिज्ञासा रही होगी

उत्तर उन्हीं को प्राप्त जिनके प्रश्न थे पर्याप्त

खोज की  पतवारनैया पार कर देगी। 

 

उत्सुक विधा, परिपक्व का जब साथ पाएगी। 

थाम कर उँगली  अतुल उत्साह  पाएगी। 

बस मार्गदर्शन चाहि मौलिक विचारों को

फिर स्वतः प्रज्ञा भी उन्हें स्वीकार कर देगी

 

प्रश्न को सम्मान दें, अधिभार ना कर दें। 

ज्ञान को विस्तार दें, व्यापार ना कर दें। 

जब सभी उपलब्धियाँ सबको सुलभ होंगी

तब सफलता प्रयत्न को नमस्कार कर देगी।

-0-

बुधवार, 8 जून 2022

363-दोष दें पर्यावरण को

राजीव रत्न पाराशर कैलिफोर्निया


 है प्रदूषण आचरण में

दोष दें पर्यावरण को।

 


प्रीति का गिरता जलस्तर

कामना के कुएँ सूखे,

शुष्क शोणित उष्ण मरु सम

आँख में हैं भाव रूखे,

मलिनता मस्तिष्क में रख

इत्र से धोएँ चरण को।

है प्रदूषण आचरण में

दोष दें पर्यावरण को॥

 

भरा नीयत मे धुआँ

निष्ठा नियम में धुंध है,

मैल है मन में, निकासी

द्वार सारे बंद हैं,

दाग दामन के छुपाते

ओढ़ झूठे आवरण को।

है प्रदूषण आचरण में

दोष दें पर्यावरण को॥

 

वृक्ष व्यवहारों के काटें

खेत रिश्तों के जलाएँ,

पराबैंगनी किरण छल की

ग्रहण शुचिता को लगाएँ,

दृष्टि दूषित, उग्रता उन्मुख है

उर के अधिग्रहण को।

है प्रदूषण आचरण में

दोष दें पर्यावरण को॥

रविवार, 10 अप्रैल 2022

343- राम वही हैं

राजीव रत्न पाराशर, कैलिफोर्निया


सात वृक्ष और एक बाण की कथा विदित है राम वही हैं।


मानव मन में मर्यादा का मर्म मुदित है राम वही हैं॥


वाणी मे जो वेद विधा विद्या व्यापित है राम वही हैं।

नित्य निरंतर अनहद में जो नाद निहित है राम वही हैं॥


सिया, गौतमी, शबरी का उद्धार उचित है राम वही हैं।

दशरथ- सुत, दशशिर -भंजन, दश दिश चर्चित हैं राम वही हैं॥


सुष्मित, भूषित, संकोची संवाद सुमित हैं राम वही हैं।

अजानुभुज, पुरुषोत्तम अश्वःमेध विजित हैं राम वही हैं॥


राजीवलोचन, पंकज पद, करकमल कथित हैं राम वही हैं।

विकट समय में साहस का जो भाव प्लवित है राम वही हैं ॥

-0-