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बुधवार, 13 अप्रैल 2022

345- श्री राम नवमी (चौपाई)

भगत सिंह राणा ' हिमाद '

 

नवमी  तिथि  पुनीत   मधुमासा ।


आम्र विटप कोकिल करि वासा ।।

प्रगटे   राम  जगत   हित   कारी ।

अवध   पुरी  में   खुशियाँ भारी ।।1

 

हर्षित   नगरी    अरु   रनिवासा ।

पुण्य  दिवस  दशरथ मन आशा ।।

गीत  सुमंगल  बहु   विधि   गाये ।

कौशल्या    मन    बोध    बधाये ।।2

 

शुभ    समाचार    दासी   दीन्हा ।

उपाय  विविध  पुरोहित  कीन्हा ।।

बोले   दशरथ   तब   मृदु  बानी ।

दीन्हि  आज   सुख  तीनों  रानी ।।3

 

तीन  कुँवर  पुनि  जन्म   सुहाये ।

हर  घर   उत्सव   प्रजा   मनाये ।।

तोरण  कलश  नगर सब  साजा ।

बाँटेहुँ   राजकोष   धन   राजा ।।4

 

देव   दनुज   किन्नर  नर   नागा ।

तीन  लोक  हर्षित  सब  जागा ।।

गौ ब्राह्मण सब विधि सुख पाये ।

जब   रघुवीर  अवध  में   आये ।।5

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शनिवार, 22 मई 2021

240-हिमालय

         भगत सिंह राणा 'हिमाद '


प्राची से  पश्चिमांचल तक तेरी 

फैली  विस्तृत  पर्वत   माला है  


उच्च  हिमालय  भारत  माँ का 

उत्तर  सीमा   का  रखवाला  है  


प्राण दान जन जीवन को देतीं

असंख्य सरिताओं की माला है  

नत मस्तक हे नगाधिराज तुम्हें ! 

जहाँ बद्री औ केदार शिवाला है  


चमकता  है  मुकुट  भाल तेरा 

शिखरों पर जो हिम की वलया  

गंगा यमुना  अलका सरस्वती 

कण्ठसुरसरि कल-कल सलया  


पुण्य  धरा पर  पूजित वेदों  में 

औषधियों का भण्डारण करता  

हिम जल से सिंचित यह धरती 

हिन्द  महोदधि  भी जल भरता  


पुण्य  सरोवर  तुझमें ही बसते 

घने अरण्य देवदारु के पलते हैं  

तेरे ही मनोरम  घाटियों  में  

फल फूल  मनोहर  फलते  हैं  


शिव पारवती करते हिम क्रीड़ा 

कैलाश  मानसर  जग  शान  है  

हे  गिरी राज !  तेरे  ही  कारण 

भारत  की  जगत में पहचान है  

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