डॉ.वंदना शर्मा
सच कड़वा होता है
वीभत्स, कुरूप
जब सामने आ जाए,
सुन्दर होता है
तभी तक
जब तक पर्दे में रहता है
सच देखना
और भी मुश्किल
स्वीकारना तो
और भी मुश्किल
बोलना कभी-कभी
आसान लगता है
लेकिन सच सुनना
और भी मुश्किल
फिर क्यों कहा गया
सत्यं शिवं सुन्दरम्
सच तो अकेला
सबके मुखौटे
उतार देता है
सच बोलने वाला ही
सबको बुरा लगता है
झूठ कितना सुंदर होता है
बचे रहते हैं रिश्ते
झूठ के कारण
खुशी का भ्रम रहता है
झूठ के कारण
सारी खुशियाँ झूठ का पर्दा
हटते ही गायब हो जाती हैं
कलयुग है ये जनाब
सच अकेला मिलता है
झूठ के साथ मेला चलता है
जो हितकर है
कल्याणकारी है जो सबके लिए
वो झूठ भी सुंदर होता है
जनहिताय बोला गया
झूठ जब सत्य बन जाए
तब ही सत्यं शिवं सुंदरम् होता है।
प्रणाम आदरणीय mam। मेरी कविता को सम्मान देने के लिए धन्यवाद आपका। डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
जवाब देंहटाएंसुन्दर कविता 💐
जवाब देंहटाएंआभार आपका आदरणीय mam
हटाएंबहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंआभार आपका आदरणीय 🙏
हटाएंबहुत सुंदर अभिव्यक्ति। सच अकेला चलता है, झूठ के साथ मेला चलता है झूठ जब सत्य बन जाए
जवाब देंहटाएंतब ही सत्यं शिवं सुंदरम् होता है।बधाई । सुदर्शन रत्नाकर
आभार आपका आदरणीय 🙏
जवाब देंहटाएंसच को संघर्ष करना पड़ता है। बहुत सुंदर विचार व्यक्त किए वंदना जी बहुत बधाई।
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