अन्नू मैंदोला (उत्तराखण्ड)
स्कूल जाते बच्चे
चले जाते हैं
अनजाने ही
सीधे बाघ के
मुँह में
शिक्षा का परचम
लहराने की बजाय
बन जाते हैं
खौफ और मातम
का माध्यम
लेकर लौटते हैं
वहशी जानवरों
के नाखूनों के
निशान अपने
जिस्म पर
अतिक्रमण हुआ हो
शायद जंगलों पर
इंसानी बस्तियों का,
तमाम कोशिशों
के बावजूद
कुछ अँतडियाँ
पचा ली जाती हैं
बाकी बचे बच्चे
जाते रहते हैं स्कूल
शिक्षा की बाहें थामे
निडरता और खौफ
के सम्मिश्रण के साथ।
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