बुधवार, 21 जुलाई 2021

260-सतत विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रणः डॉ. कविता भट्ट 'शैलपुत्री

 

भारतवर्ष के सुनियोजित सतत विकास हेतु यथोचित जनसंख्या नियंत्रण कानून सरकार द्वारा शीघ्र  ही लागू किया जाना आवश्यक है; यह बात डॉ कविता भट्ट 'शैलपुत्री', हे. न. ब. गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, उत्तराखंड द्वारा कही गयी। वे पालीवाल कॉलेज शिकोहाबाद तथा बेंगकुलु विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया के संयुक्त तत्त्वावधान में जनसंख्या और सतत विकास विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में उद्घाटन सत्र में भारत से वक्ता के रूप में बोल रही थी।भारतवर्ष के संदर्भ में जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में सख्त कानून लागू होना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से नियम पालन न होने की स्थिति में सरकार को दंडात्मक प्राविधान भी बनाने होंगे। यदि हमारे देश की जनसंख्या इसी गति से बढ़ती रही तो अगले कुछ वर्षों में चीन को पछाड़ते हुए हम जनसंख्या के मामले में विश्व के सबसे बड़े देश होंगे। सीमित संसाधनों के कारण हमारे देश का एक बहुत बड़ा वर्ग गरीबी रेखा से नीचे है। आज भी हमारे देश ही नहीं अनेक देशों में लोग गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी के शिकार हैं। जीवन-स्तर में उन्नयन और सतत विकास के लिए जनसंख्या को नियंत्रित करना हमारे देश की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए; इसीलिए जनसंख्या नियंत्रण की ठोस नीति और कानून आवश्यक है। राजनीतिक दृष्टि से इसे धर्म, जाति या वर्ग आदि के चश्में से न देखते हुए देश-हित में कानून लागू होना चाहिए।

 

डॉ भट्ट ने कहा कि 1970 के दशक के बाद जनसंख्या वृद्धि को रोकने की दिशा में सरकार ने कोई भी कार्य नहीं किया। धर्म, जाति, लिंग, वर्ग और अन्य चश्मों से देखते हुए केवल वोट बैंक के कारण जनसंख्या विस्फोट की स्थिति तक पहुंचने पर भी सरकारें सोई रहीं। इस निद्रा को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में लाल किले से यह कहा कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कोई भी व्यक्ति जो प्रयास करता है, सच्चे अर्थ में वह देशभक्ति करता है।

जनसंख्या नियंत्रण को व्यापक सतत विकास का दार्शनिक आधार प्रस्तुत करते हुए डॉ भट्ट ने दार्शनिक दृष्टिकोण से विकास की एंथ्रोपिसेंट्रिक(मानवकेंद्रित), बायोसेंट्रिक( जैव केन्द्रित) और इकोसेंट्रिक(पारस्थितिकी थ्योरी को व्याख्यायित किया।

 

डॉ .भट्ट ने कहा कि पूरे पृथ्वी ग्रह पर मनुष्य अपनी सुविधा और विकास हेतु मानवकेंद्रित, जैव केन्द्रित हो गया है और वह पारस्थितिकी केंद्रित वधारणा की  अवहेलना कर रहा है, जिससे भविष्य में मनुष्य के साथ ही पूरी प्रजातियों के अस्तित्व समाप्त हो सकते हैं। इसलिए अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि सतत विकास  में नहीं अपितु एकतरफा विकास में फलीभूत हो रही है।

सतत विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण न केवल भारतवर्ष, अपितु उन सभी देशों में आवश्यक है जहाँ आनुपातिक दृष्टि से संसाधनों की तुलना जनसंख्या अधिक है। इसमें धर्म, जाति, लिंग, वर्ग और क्षेत्र आदि को मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। मानवजाति के साथ ही समग्र ग्रह के कल्याण हेतु इसे करना चाहिए।

इस अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार के मुख्य आयोजक प्रो . एम . पी . सिंह, विभागाध्यक्ष, जीवविज्ञान, पालीवाल कॉलेज, शिकोहाबाद तथा डॉ गुस्वारणी अनवर, वानिकी विभाग, बेंगकुलु विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आगरा तथा बरेली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मोहद मुजम्मिल तथा विशिष्ट अतिथि राहुल पालीवाल, प्रबंधक, पालीवाल कॉलेज ने भी जनसंख्या और सतत विकास के विविध पक्षों को स्पष्ट किया।

अंतरराष्ट्रीय वक्ता नेपाल से डॉ . डी . के . झा तथा बांग्लादेश से डॉ . बी . के . चक्रबॉर्ती ने जनसंख्या वृद्धि को एक वैश्विक समस्या बताया और जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया।

इस वेबिनार में देश-विदेश के सैकड़ों शिक्षकों और छात्रों ने प्रतिभाग किया।

प्रस्तुति: ब्यूरो     

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यह समाचार इन पोर्टल पर भी देख सकते हैं-

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देवभूमि जे के न्यूज़ / खास बात/ डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

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मंगलवार, 6 जुलाई 2021

257- केंचुए नाग हो गए

 डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

बिल्ले हुए अब बाघ, केंचुए नाग हो गए

किरपा से राख कोयले भी आग हो गए।


कुएँ खोदकर भी कुछ प्यासे ही खड़े रहे

कुछ पी, धो-नहा कर बाग-बाग हो गए। 


अ से अमरूद, जिन्हें आ से आम ना पता

वे महान ज्ञ से ज्ञानी, बड़े ही भाग हो गए।


वन्दन में मगन रात-दिन वे वसन्त से खिले

निष्ठा हो या लगन, सब पूष-माघ हो गए।


कौवे- काँस्य पा गए, बगुलों ने रजत मढ़ा 

स्वर्ण पदक गिद्धों के भजन-राग हो गए। 


पारी की प्रतीक्षा में, तट पर मौन कुछ खड़े 

कुछ पवित्र हो, गंगा में बुलबुले झाग हो गए।


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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

255-प्रेम

 साईनी कृष्ण उनियाल


प्रेम पूजा है, भक्ति है, सुमिरन भी है


मन के मंदिर का दीपक
, ये कीर्तन भी है

माँ की ममता के आँचल  की छाया भी है

पितृ वात्सल्य पूरित ये माया भी है

दिल से दिल जोड़ दे ये वो बंधन भी है

भाव भक्ति के अश्रु का क्रंदन भी है।।

प्रेम पूजा----

दु:ख से व्याकुल हुए मन की पीड़ा भी है

रूप- रंग में रंगे पट की वीणा भी है

ये मिलन की खुशी ये विरह की घुटन

वन में नाचे मयूरों के पग की थिरकन।।

प्रेम पूजा----

न है भाषा कोई, न कोई बोल है

विधि की रचना बड़ी ही ये अनमोल है

ज्ञान से भी परे ये अजब ध्यान है

विष को पीले जो मीरा ये अमृतपान है।।

प्रेम पूजा---

प्रेम की न ही जाति न पहचान है

भावनाओं का सुंदर ये संसार है

कान्हा के जीवन का भी तो यही सार है

मुरली की धुन पे रिझाया सारा संसार है।।

प्रेम पूजा---

धरती, अंबर में है और समंदर में भी

प्रेम की भावना जग के कण-कण में है

सृष्टि में जीवन का ये ही एक आधार है

प्रेम बिन प्राणी जीवन निराधार है।।

प्रेम पूजा है----

-0- श्रीनगर (गढ़वाल),उत्तराखण्ड