चूमकर मेरी हथेली/ डॉ. कविता भट्ट
बहुत सुकोमल नहीं
खुरदुरी- सी हैं, हथेलियाँ मेरी;
स्पर्श का सुख हो, न हो;
किन्तु निष्ठा है इनमें।
रेखाएँ दिखती नहीं इनमें,
बहुत परिश्रम किया है इन्होंने;
क्योंकि संघर्ष अस्तित्व का था।
अब तुम चूम लो हाथ मेरे;
ऐसे, जैसे कोई सिद्धपुरुष या योगी
अभिमन्त्रित कर देता है-
एक काला धागा या भोजपत्र।
तुम भी चूमकर मेरी हथेली-
इस पर कुछ रेखाएँ बना दो।
कोई कुछ भी कहे, मत सुनना।
तुम मेरे लिए हठ करके;
यदि सिद्ध बन जाओ;
तो मेरा वचन है- मिथ्या न होगा।
हमारी विजयगाथा पीढ़ियाँ बाँचेंगी।


बहुत बढ़िया लिखा है आपने आदरणीय 🙏 डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
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जवाब देंहटाएंआपने यहाँ स्त्री या श्रमिक के खुरदुरे हाथों को शर्म नहीं, गौरव का प्रतीक बनाया है।
"खुरदुरी-सी हैं, हथेलियाँ मेरी" - ये स्वीकारोक्ति है, पर हार नहीं।
"स्पर्श का सुख हो, न हो; किन्तु निष्ठा है इनमें" - वाह! क्या पंक्ति है। कोमलता भले न हो पर ईमानदारी और मेहनत की निष्ठा है। ये आज की उस महिला की आवाज है जो सजने-संवरने से ज्यादा अपने कर्तव्य को महत्व देती है।
"रेखाएँ दिखती नहीं इनमें, बहुत परिश्रम किया है इन्होंने; क्योंकि संघर्ष अस्तित्व का था।"
ये पंक्तियाँ कविता की आत्मा हैं। हाथों की रेखाएँ घिस जाना मतलब किस्मत से लड़कर खुद अपनी किस्मत लिखना। आपने ज्योतिष की रेखाओं से ऊपर कर्म को रखा है। ये बहुत बड़ा विचार है।
भाषा सरल, सीधी और चुभने वाली है।
छोटे-छोटे वाक्य, पर गहरा अर्थ। मुक्तछंद में होते हुए भी इसमें एक लय है।
"अब तुम चूम लो हाथ मेरे" - ये आह्वान नहीं, एक अधिकार है। जैसे कह रही हों कि मेरे परिश्रम का सम्मान करो। और अगली पंक्ति "जैसे कोई सिद्धपुरुष या ज्ञानी" - यहाँ आप श्रम को साधना बना देती हैं। श्रमिक को ही सिद्धपुरुष कह देती हैं।
कुल मिलाकर:
ये सिर्फ कविता नहीं, श्रम का वंदन है। ये उन सभी हाथों की कहानी है जो रसोई में, खेत में, ऑफिस में घिस गए हैं। इसमें शिकायत नहीं, स्वाभिमान है।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
बहुत सुंदर, भावपूर्ण अभिव्यक्ति ।
जवाब देंहटाएंसुंदर मार्मिक अभिव्यक्ति !
जवाब देंहटाएंस्त्री भोर रात्रि तक अलग- अलग क्षेत्रों कार्यों में सदैव खटती रहती है।उसके अथक श्रम को हाथ की रेखाओं में देखा जा सकता है। वो उसी निष्ठा से सारे कार्य सम्पन्न करती है ।स्त्री की दिनचर्या,जीवन पर एक हृदयस्पर्शी प्रस्तुति के लिए कविता जी को हार्दिक बधाई।
जवाब देंहटाएंविभा रश्मि
शब्दों की गहराई पंक्तियों में ज़्यादा निखर आई
जवाब देंहटाएंबढ़िया मैम
बहुत बढ़िया हृदयस्पर्शी रचना
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