रविवार, 6 फ़रवरी 2022

326 -मेरी लता

 डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'



 


मेरी माँ ने मुझे कई बार बताया कि मेरा जन्म हमारे मिट्टी
-पत्थर वाले गोबर से लीपे हुए पहाड़ी घर में हुआ। मेरी माँ पुराने हिंदी फिल्मी गानों की बहुत शौकीन हैं और बहुत अच्छा गाती भी हैं।  उन दिनों शहर नगर गाँव -गाँव रेडियो ही मनोरंजन का सर्वसुलभ साधन था। मेरे जन्म के समय रात को आकाशवाणी विविध भारती पर कार्यक्रम छायागीत चल रहा था, गीत बज रहा था , 'शोखियों में घोला जाए , फूलों का शबाब ....' चित्रपट था प्रेम पुजारी और अमर स्वर सम्राज्ञी लता जी तथा अविस्मरणीय किशोर दा ने अपने सुरों से झंकृत किया था। गीतकार ‘नीरज’ के शब्दों को अपनी विशारद ध्वनि से झंकृत कर आत्मा तक पहुँचाने वाली लता दीदी का पूरे संगीत जगत के साथ ही जनसामान्य के मानस पटल पर एक छत्र आधिपत्य था।

मेरा जन्म वर्ष 1979 वसंत ऋतु में हुआ; उल्लेखनीय है कि प्रेम पुजारी फिल्म 1970 में रिलीज हुई थी, लेकिन इस फ़िल्म के गीत हवाओं में गुंजायमान थे और सदियों तक रहेंगे।

लता जी पर कुछ भी लिखना दुस्साहस है। उनकी आत्म तरंगित ध्वनि ने गीतों के माध्यम से मुझ जैसे कोटि- कोटि लोगों को दुःख में सम्बल और सुख में उमंग दी। लता जी आपका स्थूल शरीर तो आज प्रकृति में विलीन हो गया; किंतु सूक्ष्म रूप से आप सदियों तक करोड़ों हृदयों के सिंहासन पर विराजमान रहेंगी।

 

लता जी आपने हमारी प्रत्येक संवेदना और भाव को आवाज दी। हमें जीवन दिया।

आपके गीतों के संग्रह  मैंने  उस समय से रिकॉर्डिंग करवा कर रखे, जब मैं 500 रुपये मात्र की नौकरी करती थी और एक कैसेट की रिकॉर्डिंग रु 250 तक में होती थी। उन गीतों की रिकॉर्डिंग पर होने वाले खर्च मेरे अपने पैसे से ही होते थे; लेकिन फिर भी घरवालों के ताने मिलते थे। लेकिन जिद्द थी आपके गाने अपनी पसंद से टेप रिकॉर्डर पर सुनने की, तो ताने एक तरफ रख दिए। जब पेनड्राइव का माना आया तो वे सब सैकड़ों कैसेट अप्रासंगिक हो गए। गाना सुनने का माध्यम बदल गया, लेकिन आवाज वही रही जिससे आह निकल जाए ऐसी लता।

 

एक बार किसी बस में मेरी पसंद का गाना बज रहा था, केवल 5 किमी की यात्रा अतिरिक्त की, ताकि वह गाना पूरा सुन सकूँ

हजारों संस्मरण हैं ऐसे।

 अए मेरे वतन के लोगो ! गीत तो  प्रत्येक देशप्रेमी की आवाज़ बन गया और आज का दिन देखिए-प्रदीप जी की जयन्ती भी है आज!

आप अंतिम साँस तक गुनगुनाई जाएँगी। वस्तुतः लता एक युग का नाम है- सदियों तक अविस्मृत !

श्रद्धावनत अश्रुपूरित सुमन लता जी!