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परिचयः डॉ. कविता भट्ट 'शैलपुत्री'
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गुरुवार, 19 अप्रैल 2018
56-शैल-बाला
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डॉ.कविता भट्ट पहाड़ियों पर बिखरे सुन्दर समवेत देवत्व की सीढ़ियों-से सुन्दर खेत ध्वनित नित विश्वहित प्रार्थना मुखर पंक्तिबद्ध खड़े अन...
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बुधवार, 11 अप्रैल 2018
55-बन्द दरवाज़ा
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डॉ.कविता भट्ट सूरज निकलते ही कभी खुलता था पहाड़ी की ओर जो बन्द दरवाज़ा साथी दरवाजे से सिसकते हुए बोला- बन्धु! सुनो तो क्य...
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शनिवार, 7 अप्रैल 2018
54- पुस्तक संस्कृति में वीणा
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डॉ.कविता भट्ट
शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018
कभी डूबता नहीं सूरज
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डॉ.कविता भट्ट सूरज फिर आज मुस्काता उगा उपहास करता तुच्छ मानव का ! जो कल साँझ को कह रहा था - ‘ डूबते सूरज को नहीं नमन होता ...
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शनिवार, 31 मार्च 2018
बचपन पहाड़ का
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डॉ . कविता भट्ट ( हे . न . ब . गढ़वाल विश्वविद्यालय , श्रीनगर (गढ़वाल) उत्तराखंड ) ए . सी . में बैठ ...
11 टिप्पणियां:
बुधवार, 28 मार्च 2018
मुझे प्रतीक्षा है-
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डॉ . कविता भट्ट मैं पाषाण-हृदय हूँ; ऐसा मुझे मत बोलो प्रिय ! पत्थरों से ही फूटती हैं धाराएँ पहाड़ियों का सीना च...
11 टिप्पणियां:
शनिवार, 24 मार्च 2018
बिखरी मुस्कान होगी
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प्रो0 इन्दु पांडेय खंडूड़ी जितना गहरा है , ये समंदर , उससे कई गुना है , मेरे अंदर। मुम्बई की गर्मजोशी , नन्हीं- सी एंजल ...
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