पेज

▼
▼

बुधवार, 31 मार्च 2021

सोमवार, 29 मार्च 2021

205

 डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'








शनिवार, 27 मार्च 2021

204

 

डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'



सुदर्शन रत्नाकर




बुधवार, 24 मार्च 2021

202-आलिंगन में प्रिय/ हथेली चूमकर

डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री

1-आलिंगन में प्रिय

हथेली चूमकर



शनिवार, 20 मार्च 2021

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

बुधवार, 10 मार्च 2021

मंगलवार, 9 मार्च 2021

197

 डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'




शुक्रवार, 5 मार्च 2021

190

 

 

डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'



गुरुवार, 4 मार्च 2021

189-मद धूल में मिल जाएगा

 1-मद धूल में मिल जाएगा

 डॉ .कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

 

कुकुरमुत्ते दे रहे- चुनौतियाँ आसमान को;

कूप-मंडूकों का नर्तन, टर्र-टर्र अभिमान वो।

बरसात है- सावन न समझो।

गूगल से साभार

सागर की औकात क्या
, मौसमी नाले कहें।

तोड़के तटबंध सारे, अराजक होकर बहें।

बरसात है- सावन न समझो।

अँधेरों को है उदासी, जुगनुओं के पुंज यों।

इनमें भी तो आग है, है वो सूरज गर्म क्यों?

बरसात है- सावन न समझो।

मौसमी घासें करें कुश्ती- फसल से रात-दिन।

झाड़ियों के शीश भी उन्नत हैं- मर्यादा के बिन।

बरसात है- सावन न समझो।

मद धूल में मिल जाएगा- जब ये मौसम जाएगा।

चार दिन की है अकड़- कैसे आनन्दगान गाएगा?

बरसात है- सावन न समझो।

रिमझिम के प्यार- सा, कुछ तो सावन जी ही लें।

प्रेयसी के मनुहार- सा, भिगोएँ- भीग खुद भी लें। 

बरसात को सावन ही समझो।

-0-

2-मुक्तक- डॉ .कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

 

बाँटनी है तुझसे सर्द रातों की ठिठुरन,

ज़िंदगी तू आना गर्म कम्बल लेकर।

जाने क्यों मुझे टाट के पैबन्द प्यारे हैं, 

क्या करूँगी सपनों का मखमल लेकर?

-0-

3-मुक्तक-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

बहुत मिलेंगे पथ में हमको,

ढोल बजाकर गाने वाले ।

बहुत मिलेंगे विषधर बनकर,

जब चाहे डँस जाने वाले  ।

हमको रोज हलाहल पीना

फिर भी हमको जीना होगा,

शिव- शिवा के हम तो वंशज,

कभी न शोक मनाने वाले ।

-0-