सोमवार, 26 नवंबर 2018

94-अब तुम करो प्रहार !


अब तुम करो प्रहार !
डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

घाटी में रोता-चीखता बूढ़ा खड़ा चिनार
तिरंगे में लिपट आ अब तक शहीद हज़ार ।
डल झील सिसकती रही, करती रही विलाप ॥
जागो भरतवंशियों अब तुम करो प्रहार ।

गले मिला था जिस गली में मुझसे मेरा प्यार
दामन में उसने ही भरी थी मेरे बहार ।
उसी गली में आज मैं करती हूँ यह प्रलाप ॥
जागो भरतवंशियों अब तुम करो प्रहार ।

बाबू जी उठो, तो सुनो तुम बेटे की पुकार ।
माँ पूत तेरा करेगा फिर शत्रु का संहार
अजर-अमर-अभय है माँ तेरा यह लाल
हर जनम में करेगा माँ भारती से यह प्यार ॥
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